
27 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सिलिकॉन वैली में होंगे। फेसबुक के मुख्यालय पर वे मार्क जुकेरबर्ग से चर्चा करेंगे और फेसबुक पर ही उनका एक लाइव चैट आयोजित होगा। सिलिकॉन वैली में ही नरेन्द्र मोदी गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई और टेस्ला मोटर्स के ऐलन मस्क से भी मिलेंगे। एक समाचार एजेंसी के अनुसार जेपी मोर्गन वंâपनी अमेरिका के वित्तीय सेक्टर के पन्द्रह प्रमुख सीईओ की मुलाकात प्रधानमंत्री से करवाने वाली है। टाइम कार्पोरेशन अमेरिका की इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेन्युफेक्चरिंग कंपनियों के सौ प्रमुख सीईओ के साथ डिनर की तैयारियां कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एपल के सीईओ टिम कुक से भी मिलेंगे। भारतीय मूल के लोगों के करीब 500 संगठन प्रधानमंत्री मोदी के आगमन की तैयारियों में जुटे है। नरेन्द्र मोदी तीन दिन की अमेरिकी यात्रा में अमेरिका के एक छोर से दूसरे छोर तक जाएंगे। उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र में होने वाली बैठक को संबोधित करना है, लेकिन उनकी सिलिकॉन वैली की यात्रा की चर्चा बहुत ज्यादा है।
किसी भारतीय प्रधानमंत्री के सिलिकॉन वैली में इस तरह सोशल मीडिया साइट के मुख्यालय पर जाकर लाइव चैट में भाग लेना एक दुर्लभ अवसर हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इन यात्राओं का उद्देश्य मेक-इन इंडिया और डिजिटल इंडिया को शक्ति सम्पन्न बनाना है। प्रधानमंत्री सिलिकॉन वैली की जनक स्टैण्डफोर्ड यूनिवर्सिटी में भी जाएंगे और 28 सितम्बर को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से भी मिलेंगे, जो कि उनकी यात्रा का मुख्य कार्यक्रम वास्तव में है।
सेन फ्रांसिस्को में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वागत की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन जारी है और अब तक करीब 50 हजार लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन करा भी लिया है। यह हाल तब है जब कार्यक्रम में मौजूद रहने वालों की संख्या 18 हजार तक सीमित है। अमेरिका के वेस्ट कोस्ट की यात्रा करने वाले नरेन्द्र मोदी चौथे प्रधानमंत्री है। नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य है तेजी से सम्पूर्ण विकास।

सोशल मीडिया पर तरह-तरह के लतीफे चल पड़े है। इसमें से एक यह है कि जब बराक ओबामा नरेन्द्र मोदी से मिले थे, तब उन्होंने कहा था- ‘‘केम छो ?’’ अब लतीफा चल पड़ा है कि फेसबुक के मुख्यालय पर जाकर मार्क जुकरबर्ग से बात करने पर हो सकता है कि फेसबुक पर What's on your mind ? की जगह ‘तमारा मगज मा सू छे ?’ तो नहीं आ जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नई तकनीक की शक्ति पहचानते हैं और सोशल मीडिया की भी। उन्हें प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाने में नई तकनीक और सोशल मीडिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है। नरेन्द्र मोदी खुद सोशल मीडिया के अच्छे जानकार हैं। सिलिकॉन वैली के इन अरबपति निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों से वे भारत में धन लगाने की बात कर सकते हैं। इसमें दोनों का फायदा है। ये बड़ी कंपनियां भारत के बहुत बड़े बाजार पर कब्जा करने की तैयारी में और शक्ति लगा सकती है और इससे डिजिटल इंडिया के नारे को भी बल मिलेगा। सोशल मीडिया पर ही एक वर्ग ऐसा है, जो नरेन्द्र मोदी के विरोध में लगाता लिख रहा है। इनका आरोप है कि नरेन्द्र मोदी ने भारत की सांस्कृतिक विविधता पर अंगुली उठाई है।

एक अनुमान के अनुसार भारत में फेसबुक के करीब 14 करोड़ यूजर्स है। फेसबुक चाहेगा कि भारत में कनेक्टीविटी और तेजी से बढ़े, ताकि उसका कारोबार और तेजी से पनपे। एपल ने महाराष्ट्र सरकार से एक समझौता किया था, जिसके अनुसार उसे भारत में 500 करोड़ डॉलर का निवेश करना है। यह निवेश इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में नई मेन्युफैक्चरिंग यूनिट खोलने में अगले पांच साल में करने का लक्ष्य है।
गूगल भी भारत में स्ट्रीट व्यू कारों के संचालन की अनुमति चाहता है, ताकि मेपिंग हो सके। गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय इस बारे में विचार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय में गूगल के आवेदनों का स्टेट्स जाना है और हो सकता है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रधानमंत्री सिलिकॉन वैली में ही कोई घोषणा कर दें। कई देशों में गूगल की स्ट्रीट व्यू कारों को चलाने की अनुमति नहीं है। क्योंकि ये संवेदनशील जगहों के फोटो लेने के साथ-साथ नक्शे भी तैयार कर लेती है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सिलिकॉन वैली की आईटी कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं। सिलिकॉन वैली में काम करने वाले अधिकांश भारतीयों को अनारक्षित श्रेणी के नौजवान ज्यादा हैं। भारत में आरक्षण के खिलाफ उठ रहे आंदोलन यहां मोदी की मदद कर सकते है। यह भी हो सकता है कि प्रधानमंत्री निवेश के बजाय नई तकनीकों की मांग करें, जिनसे भारत में जनजीवन ज्यादा आसान हो सके।
डिजिटल इंडिया की सफलता बड़े विदेशी सहयोग के बजाय भारत की आधारभूत संरचना से ज्यादा जुड़ी हुई है। नेशनल ऑप्टिक फायबर नेटवर्क प्रोग्राम करीब चार साल से पिछड़ रहा है। ब्रांडबैंड हाइवे के मामले में यहीं सबसे बड़ी बाधा है। फेसबुक चाहता है कि भारत में अगले दस साल में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 100 करोड़ तक पहुंच जाए। यह तभी संभव है, जब भारत सरकार बीपीएल के लोगों को भी मोबाइल फोन और नेटवर्क उपलब्ध कराए।
पीसीओ के ढर्रे पर इंटरनेट एक्सेस पाइंट तैयार करने का खाका भी अभी नहीं बना है। राष्ट्रीय डिजिटल साक्षारता मिशन भी काफी पिछड़ गया है। सरकारी दफ्तरों को डिजिटल बनाने और सेवाओं को जोड़ने का मामला अभी बहुत पिछड़ा है। सरकारी कार्यालयों में कम्प्यूटर तो लग गए है पर वहां काम करने वाले लोग कम्प्युुटर की भाषा नहीं समझते है। इस कारण ई-लॉकर जैसी योजनाएं ठंडे बस्ते में है। सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स का उपयोग भारत में तेजी से बढ़ रहा है और इसका वार्षिक कारोबार 11 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
एक तरफ तो यह अच्छी खबर है, लेकिन दूसरी खबर जो अच्छी नहीं है, वह यह कि ई-कॉमर्स के कारण कई शहरों में कारोबार काफी कम हो गया है। मॉल्स बंद हो रहे है या बंद होने के कगार पर है। परंपरागत बाजार संकट में आने से मंदी का माहौल नजर आता है। सोशल मीडिया से ज्यादा समय युवा वर्ग ई-कॉमर्स पर देने लगा है।
सिलिकॉन वैली में नरेन्द्र मोदी के स्वागत की तैयारियों के साथ ही सोशल मीडिया पर भारत की इन तमाम समस्याओं पर चर्चा जोर पकड़ने लगी है। अब सभी लोगों को इंतजार है फेसबुक के पृष्ठ पर नरेन्द्र मोदी के साथ चैट करने का। मार्क जुकेरबर्ग ने तो अपने स्टॉफ से संभावित सवाल भी मंगवा लिए है। जिनकी संख्या 25 हजार से ज्यादा हो चुकी है। 27 सितंबर को भारत का लगभग संपूर्ण मीडिया नरेन्द्र मोदी की सिलिकॉन वैली यात्रा में व्यस्त रहेगा और इस पर चर्चा कई सप्ताह तक होती रहेगी।