
डॉ ललितमोहन पंत पेशे से सर्जन हैं. परिवार नियोजन के नसबंदी ऑपरेशन करने के क्षेत्र में दुनिया के पहले से दसवें स्थान पर केवल डॉ पंत ही पंत हैं. उन्होंने दूरबीन पद्धति (हिस्ट्रोस्कोपी) से साढ़े तीन लाख से भी ज़्यादा ऑपरेशन किये हैं, जबकि दुनिया का कोई और सर्जन एक लाख ऑपरेशन भी नहीं कर सका है. गिनीज़ जैसी रेकॉर्ड दर्ज करनेवाली हर किताब में उनका नाम शामिल है। वे सरकारी डॉक्टर हैं और माना जाता है कि उनके ऑपरेशन की वजह से भारत की कुल आबादी में कम से कम दस लाख की कमी आई है. वे न होते तो भारत की आबादी दस लाख ज्यादा होती!
अगर डॉ पंत नसबंदी (Vasectomy) के बजाय IVF यानी टेस्ट ट्यूब बेबी पैदा करने या मोटापा घटाने का ऑपरेशन (बेरियाट्रिक सर्जरी) का धंधा करते और एक ऑपरेशन का 10,000 रु. भी वसूलते तो अब तक 350,000 ऑपरेशन के साढ़े तीन सौ करोड़ तो हो ही चुके होते!
इस 'व्यापम' के युग में अब कोई सर्जन उन जैसा नहीं हो सकता.
असंभव.
अजीब बात है कि डॉ ललितमोहन पंत और उनके स्टॉफ़ के लोग रात-दिन ऑपरेशन करते हैं और सरकार परिवार नियोजन के सम्मानित करती है कलेक्टरों को!
परिवार नियोजित रखने के इन ऑपरेशन में पुरुष वर्ग की उपेक्षा से उन्हें दुःख है, क्योंकि उनके साढ़े तीन लाख ऑपरेशन में पुरुषों की संख्या केवल 12 हजार है. इसे प्रोत्साहित करने के आजकल सर्जरी करनेवाले पुरुषों के इंटरव्यू स्मार्टफोन से रेकॉर्ड करके फेसबुक पर डाल देते हैं. इस तरह वे फेसबुक का अनूठा उपयोग करते हैं. वे कहते हैं कि अन्य ऑपरेशन की तुलना में उनके ऑपरेशन की विफलता का प्रतिशत न्यूनतम है। कई बार ऑपरेशन करानेवाले की अज्ञानता और लापवाही भी इसका कारण होती है. सैकड़ों ऑपरेशन उन्होंने ऐसे भी किये हैं, जब किसी पुरुष या महिला ने फिर से परिवार बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की. डॉ पंत और उनके परिवार पर तरह-तरह के आरोप भी लगे, लेकिन वे इससे विचलित नहीं हुए.
उन्होंने बीस साल में करीब 5000 पेड़ लगाये हैं और उन्हें बड़ा किया है. पेड़ों को ट्रांसप्लांट भी करवाते हैं. खरगोन जिले के आस्थाग्राम ट्रस्ट में भी काम करते हैं. इस ट्रस्ट की एक स्कीम है - तेरा मेरा. इसमें उनका समूह इलाके के लोगों से तरह तरह का सामान इकट्ठा करता है और एक निश्चित दिन जरूरतमंद लोग वहां आकर अपनी पसंद का जरूरी सामान ले जाते हैं.