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इंदौर के एमटीएच कम्पाउंड स्थित शेरों वाली माता के मंदिर के बाहर अचानक मेरी मुलाकात उस शख्स से हुई। मैं उन्हें पहचान नहीं पाया, लेकिन उन्होंने मुझे पहचान लिया। मेरा नाम पूछा और बताया कि हमने साथ में एक ही कंपनी में काम किया है। उनके याद दिलाने पर मुझे याद आया कि हां, ये तो आनंद सिंह तोमर हैं। वर्तमान में वे लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड फाइनेंस में अध्यापन कर रहे हैं.

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आप यहां कैसे?

आनंद ने बताया कि वो कुछ दिनों के लिए इंदौर आए हुए हैं। मैंने पूछा- कहां हो, क्या कर रहे हो?

आनंद का जवाब था कि मैं आजकल यूके में हूं और वहां मैंनेजमेंट पढ़ा रहा हूं। 

तो आप भी मैंनेजमेंट गुरू बन गए? मैंने पूछा।

मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा कि मैंनेजमेंट गुरू तो नहीं, मैंनेजमेंट पढ़ा जरूर रहा हूं। अभी तो मेरी उम्र ही कितनी है। संघर्ष अभी भी चल रहा है, लेकिन यह वैसा संघर्ष नहीं है, जैसा शुरूआत के दिनों में था। 

आनंद और मैं निकट के कॉफी हाऊस में चले गए। वहां इत्मीनान से मैंने पूछा अपने बारे में बताओ। कैसे वहां तक पहुंच गए? आप तो शायद इंदौर के भी नहीं हो? 

anand-2आनंद ने बताया कि  मैं इंदौर का ही हूं.  मेरी पढ़ाई इंदौर में हुई है। मैंने बीबीए देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से ही किया था और फिर उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय से एमबीए। उसके बाद लंदन की मिडिलसेक्स यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग मैनेजमेंट में एमए किया। उन्होंने मेरा ज्ञान बढ़ाया कि वहां इस तरह के एमए भी होते हैं। 

पिछले 14 साल से आनंद सिंह तोमर  अलग-अलग पदों पर कार्य कर रहे है। कार्पोरेट की दुनिया से उनका पहला जॉब एनआईआईटी मुंबई से शुरू हुआ। फिर वे पुणे के आईसीए में रहे और फिर सीधे लंदन चले गए। वहां उन्होंने एन पॉवर और वेन लियर लिमिटेड में अपने रिसर्च प्रोजेक्ट पूरे किए।  वे दुनिया के कई महत्वपूर्ण शिक्षा संस्थानों से जुड़े, जिनमें लंदन के एनडब्ल्यूसी, लंदन के ही वन टेक कॉलेज, फेयर फिल्ड स्कूल ऑफ बिजनेस, रिजेंड कॉलेज, विलियम्स कॉलेज आदि प्रमुख है। वर्तमान में वे लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड फाइनेंस में अध्यापन कर रहे हैं.

आनंद अपनी रिसर्च मार्केटिंग मैनेजमेंट, कंज्यूमर बिहेवियर, ब्रांड मैनेजमेंट आदि क्षेत्रों में कर रहे है। उनका एक बहुचर्चित आलेख कन्वींसिंग पॉवर : डज इट एग्जीस्ट ऑर नॉट? बहुचर्चित रहा है। एक और रिसर्च पेपर ‘इनोवेशन और कस्टमर रिटेन्शन आर दे रिलेटेड?’ भी चर्चित रहा है। लंदन के अखबारों में आजकल वे नियमित रूप से लिखते है और मैनेजमेंट के संस्थानों में भाषण देने भी जाते है। लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड फॉरेस्ट में अध्यापन कर रहे आनंद के अनेक रिसर्च पेपर पब्लिश हो चुके है। इसके अलावा वे ब्रिटेन में रहने वाले भारतीयों के समुदाय से भी जुड़े है। 

अपने मधुर व्यवहार से उन्होंने अपने विद्यार्थियों का दिल तो जीता ही है, उनके साथ अध्यापन कर रहे लोग भी उनसे बहुत खुश है। आनंद अपनी बातचीत में इंदौर के कनारा बैंक में काम करने वाले मैंनेजर जे.सी. शर्मा को बहुत याद करते है और अपनी कामयाबी का काफी श्रेय उन्हीं को देते है। आनंद ने बताया कि मैं जो कुछ हूं, उसमें मेरे माता-पिता, मेरे गुरू, जे.सी. शर्मा साहब जैसे शुभचिंतक और मेरी पत्नी छाया तोमर के कारण हूं। गायत्री माता के भक्त आनंद सिंह मानते है कि माता के आशीर्वाद के बिना दुनिया में कुछ भी संभव नहीं है। विज्ञान कहीं भी चला जाए, कितनी भी उपलब्धियां हासिल कर लें, लेकिन गायत्री माता की कृपा के बिना कुछ भी संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि वे अपने परिवार के साथ इंदौर आना हमेशा पसंद करते हैं और जब भी इंदौर आते है एमटीएच कम्पाउंड के इस मंदिर आना नहीं भूलते। 

 

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