
आपने दूध उत्पादकों, किसानों, व्यापारियों, महिला संगठनों, मजदूरों आदि के कोऑपरेटिव मूवमेंट के बारे में सुना होगा, पर आज मैं आपको मिलवा रहा हूँ, कल्चरल कोऑपरेटिव मूवमेंट के साथी जयंत भिसे से. यह विचार संस्कृतिकर्मी सुधाकर काळे का था; अमली जामा पहनाया जयंत भिसे ने.
जयंत भिसे ने ग्यारह लोगों के साथ मिलकर एक ट्रस्ट बनाया, ट्रस्ट का काम है इन्दौर में हर महीने एक नाटक का मंचन और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम कराना. उनकी संस्था के 4000 से ज्यादा सदस्य हैं. आजकल मराठी में होनेवाले लगभग हर प्रमुख नाटक का मंचन इन्दौर में कम से कम पांच बार होता है. पांच बार इसलिए कि नाटक देखनेवालों की संख्या 4000 से भी ज्यादा होती है और इन्दौर में इतना बड़ा नाट्यगृह नहीं है इसलिए संस्था ने सदस्यों को पांच दर्शक समूह में बाँट दिया है.

अब इंदौर में उस संस्था के नाट्य आयोजन की पांच प्रस्तुतियाँ होती हैं; बोलचाल की भाषा में कहें तो अलग अलग नाटक के पांच शो साल के हर महीने में होते हैं दो शो शनिवार को और तीन शो रविवार को. देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के भव्य सभागृह की बुकिंग सालभर के पांच शो की कर दी जाती है और सबसे शानदार बात यह है कि सभी पांच समूहों का शो का दिन और समय सालभर के लिए तय है. शो का दिन और समय तो ठीक, उस दर्शक की सीट भी सालभर के आयोजनों के लिए तय है. यानि वह दर्शक सालभर के आयोजन में अपने समूह में जाकर सभी नाटकों में पहले से तय की जा चुकी सीट पर ही बैठता है. वह मनमाने समय पर आकर / मनमानी सीट पर नहीं बैठ सकता. अगर वह अपने ग्रुप के शो के वक़्त नहीं आ सकता, तो वह सीट खाली रहती है. रेल की बर्थ जैसी अट्टस-बट्टस यानि एक्सचेंज की सुविधा यहाँ नहीं है. इससे दर्शकों में नाटक के लिए गंभीरता का भाव आया है.

जयंत भिसे करीब बीस सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक और खेल संगठनों से जुड़े हैं. मराठी सोशल ग्रुप के गठन के पीछे भी उनका योगदान है जो शहर में अनेक आयोजन का सूत्रधार है. पहले वे एक को ऑपरेटिव बैंक में जीएम थे, अब वीआरएस लेकर कल्चरल कोऑपरेटिव मूवमेंट चला रहे हैं. मजेदार बात यह है कि अपने समय की बर्बादी रोकने के लिए वे मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते.
जयंत भिसे जी से संपर्क :
417, ट्रेड हाउस, 14 /3 साउथ तुकोगंज,
ढक्कनवाले कुएं के पास,
इन्दौर 452001
(0731) 251-61626162