
वे फेसबुक पर तो हैं, पर महीनों यहाँ झांकती भी नहीं. फेसबुक को 'टाइम किलिंग मशीन' समझती हैं वे, क्योंकि कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं. वे इंदौर में लोगों के नेत्रदान करवाती हैं. उनकी संस्था को अब तक 4 हजार 386 आंखें दान में प्राप्त हुई है। उनकी मेहनत से हजारों लोगों को रोशनी मिली है.

शादी के बाद महाराष्ट्र के जालना से इंदौर आने वाली साधारण गृहिणी उमा झंवर ने पति की असामयिक मृत्यु के बाद जनसेवा को जीवन लक्ष्य बनाया. परिवार ने पूरी मदद की. सेवा को मंत्र बनाकर वे नेत्रदान के अभियान से जुड़ गई. उन्होंने प्रशिक्षण लिया, संसाधन जुटाए और एम के आई बैंक का जिम्मा लिया. वे हज़ारों लोगों के जीवन में रोशनी लाने में सफल रहीं. अब उनकी संस्था नेत्रदान की व्यवस्था तो करती ही है, ग़रीब दृष्टिहीनों के ऑपरेशन जिम्मा भी लेती है.

बी.कॉम. तक पढ़ीं, श्रीमती झंवर न तो डॉक्टर हैं और न ही पैरा-मेडिकल के क्षेत्र में. उनकी मेहनत से इंदौर में नेत्रदान का एक बड़ा अभियान खड़ा हो गया है, उनकी संस्था में हजारों लोगों ने नेत्रदान के संकल्प पत्र भरे है. 29 अप्रैल 2013 को केवल एक ही दिन में 28 हजार 785 लोगों ने नेत्रदान के संकल्प पत्र भरकर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया था.

भारत का पहला नेत्र प्रत्यारोपण करीब 55 साल पहले इंदौर में हुआ था. मध्यप्रदेश का नीमच ऐसा शहर है, जहां के 99 प्रतिशत लोगों में नेत्रदान का संकल्प किया है. इतने प्रचार-प्रसार के बाद भी लोगों में नेत्रदान को लेकर बहुत सी गलतफहमियां हैं. नेत्रदान करने वाले के शरीर से केवल कार्निया (आंखों के अंदर का काला गोल झिल्ली वाला हिस्सा, यह आंख की परत होता है) निकाला जाता है, पूरी आंख नहीं. देखने में यह पता भी नहीं चलता. कार्निया निकालने की प्रक्रिया केवल 15 मिनिट में पूरी हो जाती है. कार्निया को निकालने और सुरक्षित रखने का खर्च करीब 5 हजार रुपए बैठता है, जो एम के ट्रस्ट वहन करता है. शर्त यह है कि किसी का निधन होने के 4 से 6 घंटे के भीतर ही कार्निया निकाला जा सकता है. जिस व्यक्ति ने नेत्रदान का संकल्प पत्र नहीं भरा हो, लेकिन उसके उत्तराधिकारी चाहे, तो भी नेत्रदान संभव है. चश्मा पहनने वाला आदमी भी नेत्रदान कर सकता है और डायबिटीज का मरीज भी.

भारत में करीब 35 लाख लोग ऐसे है, जो देख नहीं सकते. हर साल 30 हजार ऐसे बच्चे जन्म लेते है, जो पैदाइशी दृष्टिहीन होते हैं. अगर भारत के सभी लोग नेत्रदान का संकल्प कर लें, तो कार्निया के कारण होने वाले अंधत्व को केवल 15 दिन में दूर किया जा सकता है. इसका मतलब यह हुआ कि लाखों लोग वापस रोशनी पा सकते है.
मौत के बाद जलाकर या दफनाकर क्या मिलनेवाला? आँखें दान कर दीजिए, किसी के काम आएँगी। आँख पानेवाले को भी तो पता चले कि दुनिया वास्तव में उतनी बुरी नहीं है :
और जानकारी चाहिए तो यह वेबसाइट देखें :
उमा झंवर का इंटरव्यू :
https://www.youtube.com/watch?v=EYCRoNUQ3Ic
एम के इंटरनेशनल आई बैंक
टैरेस फ्लोर,
साईं सम्पदा, छोटी खजरानी , एमआर 9, इंदौर 452 008.
+91 9406 63 19 19
+91 7869 19 19 19
+ 0731 407 59 19
+0731 25 56789
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