
12 की उम्र में उसने अपनी निजी वेबसाइट बना ली थी (18 साल पहले, जब भारत में इंटरनेट अपनी शुरूआत में ही था)। 13 की उम्र में उसे एक नौकरी का प्रस्ताव मिल गया था। 14 की उम्र में उसकी पहली किताब बाजार में आ गई थी (द अनआफिशियल गाइड टू इथिकल हैकिंग, जिसकी 10 लाख से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी है)। 15 का होते-होते उसे सेलेब्रिटी का दर्जा मिल चुका था। 25 में वह खुद के नाम पर एक शैक्षणिक संस्थान खोल चुका था और अब तक वह संस्थान करीब पचास हजार लोगों को डिप्लोमा दे चुका है।
वह अभी 30 साल का है। वह है अंकित फाडिया।
जब अमेरिका की सरकार अलकायदा के खिलाफ सायबर वार से जूझ रही थी। तब अमेरिका ने भारत सरकार से मदद मांगी और भारत सरकार ने अंकित फाडिया को अमेरिका भेजा। अंकित का काम वहां आतंकियों की उन तस्वीरों में से कूटरचित संदेशों को खोजना था, जिसके माध्यम से आतंकी आपस में कम्युनिकेशन किया करते थे। अंग्रेजी में इसे Steganography कहते है। डीपीएस दिल्ली और स्टेनफोर्ड में पढ़ाई करने वाले अंकित ने मैनेजमेंट साइंस पढ़ाई की है। वह भी कम्युटर सिक्युरिटी एक्सपर्ट के रूप में। 13 साल की उम्र में अंकित ने कम्प्युटर पत्रिका ‘चिप’ की वेबसाइट को हैक कर लिया था। कुछ देर बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनसे कोई आपराधिक गतिविधि हो गई है। उन्होंने पत्रिका के संपादक को तत्काल ई-मेल किया, जिसमें लिखा था कि आपकी पत्रिका की वेबसाइट की सिक्युरिटी अच्छी नहीं है। मैंने उसे हैक कर लिया है और केवल आपको यह बताने के लिए कि आपको अपनी वेबसाइट की सिक्युरिटी पर ध्यान देना चाहिए। इसके बाद अंकित ने वेबसाइट को वापस ऑनलाइन कर दिया। साथ ही अंकित ने पत्रिका के संपादक को कुछ ऐसे सुझाव भी दिए, जिन्हें उपयोग में लाकर पत्रिका की वेबसाइट के डाटा को हैकिंग से बचाया जा सकता था। पत्रिका के संपादक की जवाबी मेल आई, जिसमें अंकित का आभार माना गया था और साथ ही नौकरी का प्रस्ताव भी। कहा गया था कि आप हमारी पत्रिका में संपादकीय विभाग में शामिल हो जाइए। जब अंकित ने मेल का जवाब लिखा और बताया कि मैं अभी केवल 13 साल का हूं, तब संपादक ने जवाब दिया कि नौकरी के लिए आपको पांच साल इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि आप अभी बालिग नहीं है, लेकिन आप हमारी पत्रिका में नियमित रूप से लिखने का काम कर सकते है।
अंकित ने 30 से अधिक किताबें लिखी है, जो कई भाषाओं में अनुवाद होकर भी छपी है, ये सभी किताबें इंटरनेट और कम्प्युटर से जुड़ी हुई है। हैकिंग के बारे में उनका कहना है कि भारत में डाटा चोरी रोकने के कानून काफी अच्छे है और कानूनी रूप से कम्प्युटर, मोबाइल या टेबलेट से डाटा चुराना अपराध है। अपनी हैकिंग को अंकित फाडिया कानून सम्मत बताते है और कहते है कि हम जो हैकिंग और हैकिंग के गुर सिखाते है, वे सब कानून के दायरे में आते है। हम सभी प्रमुख कंपनियों को उनकी डाटा सिक्युरिटी के बारे में आगाह करते है और उस डाटा को चोरों से कैसे बचाया जा सकता है यह भी सुझाते हैं। अंकित फाडिया ने इथिकल हैकिंग के ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू किए है और वे कम्प्युटर साइंस के विद्यार्थियों को डाटा सिक्युरिटी के बारे में पढ़ाते भी है।
नेशनल पुलिस एकेडमी में भी अंकित फाडिया जाते रहते है। उनका मानना है कि भविष्य में पुलिस को भी और अधिक टेक्नोसेवी होना पड़ेगा, क्योंकि अपराधी नई-नई तकनीकों को पकड़ रहे हैं। इन अपराधों की खोजबीन में पुलिस का भी टेक्नोसेवी होना बहुत जरूरी है। अंकित फाडिया ने अपनी निजी वेबसाइट अंकितफाडिया.इन पर सभी हैकर्स को चुनौती दी है कि वे उनकी यह वेबसाइट हैक करके दिखाए। इतना ही नहीं उन्होंने इसके लिए पुरस्कार भी घोषित कर रखा है। दिलचस्प बात यह है कि खुद अंकित की वेबसाइट भी एक बार हैक हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने अपनी सिक्युरिटी में कुछ बदलाव किए।
जूलियन असांजे ने जिस तरह अमेरिका की सरकारी वेबसाइट्स से डाटा हैक करके दुनियाभर में तहलका मचा दिया था, उस तरह की गतिविधि को अंकित गैरवाजिब मानते है। उनका मानना है कि इस तरह की गतिविधियां गैरकानूनी है और उनका किसी भी तरह समर्थन नहीं किया जा सकता। भारत में इस तरह का कोई खतरा फिलहाल नहीं है, क्योंकि हमारे यहां अभी भी बहुत सारे फैसले कागजों पर ही लिखे जाते है। इन कागजी फाइलों को चुराना आसान नहीं, क्योंकि उन्हें भौतिक रूप से ही चुराना पड़ेगा, लेकिन भविष्य में हो सकता है कि भारत में भी ऐसी वारदातें हो। इसीलिए सुरक्षा भी जरूरी है। अंकित का कहा है कि हमारे देश में बैंकों का सारा कामकाज ऑनलाइन होने लगा है। आप कल्पना कीजिए कि किसी बैंक का डाटा कोई चुरा ले, तो उसके अंजाम कितने गंभीर हो सकते है। अगर भविष्य मे कोई विश्वयुद्ध फिर से छिड़ा, तो उसमें लड़ाईयां सेना के बजाए इंटरनेट पर लड़ी जाएगी। एक दूसरे के दुश्मन देश इंटरनेट के जरिये महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर लेंगे औ उन्हें नष्ट भी कर देंगे। भारत में अभी इस तरह के खतरे कम है, क्योंकि भारत में इंटरनेट अमेरिका के बाद आया है। अमेरिका में लगभग सभी कार्यों पर इंटरनेट की जरिए नियंत्रण होता है। यहां तक कि ट्रैफिक सिग्नल्स भी इंटरनेट के जरिए ही दिशा निर्देशित होते है। एंटी सोशल हैकर्स वहां कई बार ट्रैफिक जाम करके व्यवस्था को तबाह कर चुके है। भारत में ट्रैफिक सिग्नल्स मेन्युअली सेट किए जाते है, इसलिए यहां वैसा खतरा कम है। एक और बात है कि जब हमारे देश के लोग यातायात नियमों का पालन ही नहीं करते, तो ऐसे में इन हैकर्स का खतरा और कम हो जाता है।
अंकित का कहना है कि हैकर्स दो तरह के होते है- पहले तो वे जो गैरकानूनी उद्देश्य और तरीके से हैकिंग करते है और दूसरे वे जो हैकिंग कानून सम्मत ढंग से इंटरनेट सिक्युरिटी सुधारने के लिए करते है। अपने आप को वे दूसरी तरह का हैकर कहते है। आपराधिक इरादे से हैकिंग करने वालों के गिरोह को ब्लैक हैट ग्रुप कहा जाता है, जबकि कानूनी हैकिंग करने वाले फाइट हैट्स कहलाते है। हैकिंग की दुनिया में पाकिस्तान के कुछ गिरोह दुनियाभर में सक्रिय है, जिनमें एंटी इंडिया क्रू, जी फोर्स, ग्रे हेयर आदि कुख्यात है। नए-नए लोग इन ग्रुप से जुड़ते रहते है और कई लोग ग्रुप छोड़ भी देते है।
अंकित फाडिया का कहना है कि हैकिंग मेरी हॉबी नहीं, मेरा करियर है। यहीं मेरी रोजी-रोटी है। मेरी किताबें लाखों में बिकती है। मैं टीवी पर शो करता हूं और अखबारों में कॉलम लिखता हूं। दुनियाभर के शहरों में भाषण देने भी जाता हूं, इस सब से मुझे ठीक-ठाक आय हो जाती है। भारत में पोर्न वेबसाइट्स पर बैन लगाने को वे उचित नहीं मानते, उनका कहना है कि यह हमारी आजादी में दखल है और दूसरी बात यह कि गैरकानूनी काम रोकने के लिए भारत में पहले से ही बहुत सारे कानून हैं। भारत में चीन जैसा नहीं है जहां व्यक्तिगत आजादी बिलकुल भी नहीं। चीन ने 30 हजार से भी ज्यादा लोगों को इस काम के लिए नियुक्त कर रखा है कि वे दूसरे देशों की वेबसाइट्स हैक करके चीन में चलन से रोक दें। चीन में इस तरह की सेंसरशिप बहुत आम है। इथिकल हैकिंग के जरिए कंपनियां अपनी सिक्युरिटी को इम्प्रूव कर सकती है।