
जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली की प्रक्रिया काफी धीमी गति से चल रही है। मोबाइल और इंटरनेट सेवा बहाल होने लगी है। दो महीनों में हिंसक झड़पों में मरने वालों की संख्या 70 के पार हो चुकी है, लेकिन अभी भी कुछ इलाकों में कफ्र्यू समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में केन्द्र सरकार ने कश्मीर में हालात सामान्य बनाने के लिए जो कोशिशें की है, उसमें गृह मंत्री की कश्मीर यात्रा शामिल है। केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह कश्मीर की दो दिन की यात्रा के दौरान सोशल मीडिया पर सभी लोगों के सामने खुले मन से अपने विचार व्यक्त करते रहे। गुरुवार को उन्होंने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के साथ पत्रकार वार्ता को भी संबोधित किया और अपनी चिंताएं बताते हुए महबूबा मुफ्ती से केन्द्र की अपेक्षाएं भी उजागर की। इस प्रेस कान्फ्रेंस से कश्मीर के लोगों में क्या संदेश गया है, उसे समझने में तो अभी काफी वक्त लगेगा, लेकिन सोशल मीडिया पर जम्मू-कश्मीर को लेकर जो एकतरफा प्रचार चल रहा था, वह इस यात्रा से प्रभावित हुआ है।
गृहमंत्री ने अपने ट्विटर अकाउंट पर सभी लोगों के लिए यह संदेश दिया कि मैं नेहरू गेस्ट हाउस में रुकूंगा और जिस किसी व्यक्ति को कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत पर भरोसा हो, वह मुझसे चर्चा करने के लिए कभी भी आ सकता है। हजारों लोगों ने उनके इस ट्वीट को लाइक किया और हजारों ने ही उसे रि-ट्वीट भी किया। केन्द्रीय गृहमंत्री ने श्रीनगर दौरे के दौरान सिविल सोसायटी के समूहों, राजनैतिक दलों और स्थानीय संगठनों के लोगों से मुलाकातें की। इसका खुलासा उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर नहीं किया, लेकिन उन्हें आशा है कि इसके नतीजे अच्छे निकलेंगे। इसके पहले 10 अगस्त को गृहमंत्री अपने ट्विटर अकाउंट पर लिख चुके थे कि दुनिया की पूरी ताकत हमसे जम्मू-कश्मीर को ले नहीं सकती। बात होगी तो कश्मीर पर नहीं होगी, पीओके पर होगी। इसके बाद उन्होंने ट्विटर पर ही यह स्पष्ट कर दिया था कि भारत की धरती पर पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा नहीं चलेगा।
सोशल मीडिया पर अनेक लोगों ने जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की इस बात की तारीफ की कि उन्होंने कश्मीर घाटी में शांति बहाली के लिए लोगों से जो अपील की है, वह सराहनीय है। महबूबा ने सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंकने के लिए बच्चों को उकसाने और उनकी मदद लेने को गलत ठहराया था। महबूबा मुफ्ती ने 2010 और 2016 में कश्मीर घाटी में हुए हिंसक प्रदर्शनों के अंतर को भी बताया।
बड़ी संख्या में लोगों का यह मानना है कि केन्द्र सरकार की मदद से जम्मू-कश्मीर राज्य सरकार को आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए काम करने चाहिए। कश्मीर घाटी में हिंसक आंदोलनों के कारण शिक्षण संस्थाएं कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहे है। गृहमंत्री से श्रीनगर में मिलने वाले करीब 300 लोगों में से आधे ने सोशल मीडिया पर आशाजनक परिणामों की बात कही है। महबूबा मुफ्ती ने भी अपने ट्वीट पर लिखा है कि सरकारें चाहती है कि जम्मू-कश्मीर में अमन कायम रहे और प्रदेश तरक्की करे, इसीलिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह दो दिन की यात्रा पर आए हैं। महबूबा मुफ्ती ने आंदोलनकारियों से यह बात कही है कि वे अपने आंदोलन जारी रख सकते हैं, लेकिन कोई भी आंदोलन हिंसक नहीं होना चाहिए। बंदूकों से किसी भी समस्या का समाधान होने वाला नहीं है, समाधान होगा, तो बातचीत से ही।
सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए उमर अब्दुल्ला ने भी शांति बहाली की अपेक्षा तो की है, लेकिन महबूबा मुफ्ती सरकार को नाकारा भी बताया है। उमर अब्दुल्ला सोशल मीडिया पर जो भी संदेश देते रहे है, उसका लक्ष्य आमतौर पर महबूबा मुफ्ती की सरकार को असफल साबित करना ही लगता है। स्वतंत्रता दिवस पर झंडावंदन करने के दौरान रस्सी सही तरीके से नहीं बांधने के कारण ध्वज के गिरने को भी लोगों ने गंभीर चूक माना। सरकारी स्तर पर इसके खंडन हुए है, लेकिन फिर भी कई लोगों को यह बात अच्छी नहीं लगी कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान में कोई चूक हो।
इस बीच कुछ ऐसे लोग भी है, जो अभी भी सोशल मीडिया पर सक्रिय है और लिख रहे है कि मुख्यमंत्री मुफ्ती कश्मीर की समस्या के लिए केन्द्र को जवाबदार ठहरा रही है और केन्द्र इसके लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार बता रहा है। कश्मीर की जनता को इन दोनों से ही निजात चाहिए। महबूबा मुफ्ती गत दो महीनों से जो भी भाषण देती है, उसमें वे कश्मीर के लोगों की वेदना का जिक्र जरूर करती हैं।
27 Aug 2016