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कबाली के बहाने हमारी मूर्खताओं का 'राष्ट्रीयकरण' किया जा रहा है. सोशल मीडिया पर जो माहौल बनाया गया है, वह इस फिल्म के प्रचार का हिस्सा लगता है. 24 घंटे फिल्म का प्रदर्शन, कई दफ़्तरों में छुट्टी का ऐलान, कबाली स्पर्धाओं का आयोजन, रजनीकांत के कबालीवाले गेटअप के चाँदी के सिक्के ढालकर कर्मचारियों को पुरस्कार में देना...यह माहौल क्यों बनाया जा रहा है मानो कबाली फिल्म देखना हमारे राष्ट्रीय कर्तव्य में शामिल है? सुबह सवेरे में मेरा साप्ताहिक कॉलम :

जितने लतीफे संता-बंता के नहीं है, उससे ज्यादा रजनीकांत के हैं। कल रिलीज हुई उनकी कबाली दक्षिण भारत के सिनेमा घरों में 24 घंटे लगातार चल रही है। उनकी फिल्म देखने के लिए दक्षिण भारत में छुट्टी जैसा माहौल हो जाता है। रजनीकांत के बारे में कहा जाने लगा है कि सलमान, शाहरुख, आमिर और अक्षय कुमार जैसे स्टार की फिल्में छुट्टी देखकर लगाई जाती है और रजनीकांत की तो फिल्म जिस दिन लगती है, उस दिन छुट्टी का ऐलान हो जाता है।

कल शुक्रवार को भी यही हुआ। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल आदि राज्यों की कई कंपनियों ने अवकाश घोषित कर दिया। इन कंपनियों के कर्मचारी रजनीकांत के दीवाने हैं। मैनेजमेंट को लगता है कि कर्मचारी सीएल या सिक लिव लें और फोन रिसीव न करें, उससे अच्छा है कि आधिकारिक रूप से छुट्टी का ऐलान कर दिया जाए। इस बात को प्रचारित भी जोर-शोर से किया जा रहा है। हो सकता है कि यह फिल्म के प्रचार का एक हिस्सा हो। इसके साथ ही कबाली को लेकर कई वंâपनियों ने प्रतियोगिताएं आयोजित की हैं। सोशल मीडिया पर भी इन प्रतियोगिताओं की संख्या अच्छी खासी है। मणीप्पुरम गोल्ड लोन वालों ने भी एक प्रतियोगिता रखी है, जिसकी विजेताओं को अच्छे खासे इनाम दिए जाने वाले है। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए ट्विटर पर कबाली को फॉलो करना अनिवार्य है। इस प्रतियोगिता के बहाने ही फिल्म का प्रचार हो जाएगा और फिल्म के साथ-साथ कंपनी का भी। इसी के साथ मुथूट फायनेंस कंपनी ने रजनीकांत के चेहरे वाले चांदी के सिक्के भी ढलवा लिए है, जो वह अपने कर्मचारियों को श्रेष्ठ कार्य करने पर पुरस्कार के रूप में देगी। कई कंपनियों ने सिनेमा घरों के सारे टिकट अपने स्टॉफ के लिए बुक कर रखे थे और कंपनी ने उसे अपने कर्मचारियों को तोहफे के रूप में दिए।

मास मीडिया के साथ ही सोशल मीडिया पर भी कबाली छाई हुई है। एक बुजुर्ग डॉन का किरदार करने वाले रजनीकांत की पत्नी चर्चित अभिनेत्री राधिका आप्टे है। प्रकाश राज इस फिल्म में खलनायक है और बड़ी मान-मुनव्वल के बाद उन्होंने यह भूमिका स्वीकार की। केरल में यह फिल्म सबसे ज्यादा सिनेमा घरों में एक साथ रिलीज हुई। तमिल के अलावा यह फिल्म हिन्दी, मलयालम, कन्नड़, तेलुगु में भी रिलीज हुई है और इन भाषाओं में तो पूरी दुनिया के स्क्रीन्स पर आई ही, दो महीने बाद जापान, इंडोनेशिया, मलेशिया आदि देशों में भी वहां की भाषा में डब होकर आने वाली है।

सोशल मीडिया पर इस फिल्म के लीक होने की खबरें भी प्रसारित हुई। रजनीकांत की तरफ से लोगों से अपील की गई कि वे इस फिल्म को सिनेमाघर के बड़े पर्दे पर ही देखें, क्योंकि यह फिल्म ऐसी नहीं है कि कम्प्यूटर के छोटे से स्क्रीन पर आपको पसंद आएगी। जिस तरह बजरंगी भाईजान और सुल्तान जैसी फिल्मों के लिए सिनेमाघरों के टिकट के दर बढ़ा दिए गए थे, वैसे ही कबाली के लिए सिनेमा टिकट महंगे कर दिए गए है। इसके खिलाफ लोग मद्रास हाईकोर्ट तक पहुंचे, लेकिन हाईकोर्ट ने इस मामले में कोई भी हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। यह भी प्रचारित किया गया कि रिलीज होने के पहले ही कबाली फिल्म ने विभिन्न राइट्स बेचकर 200 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। अनेक बड़ी कंपनियों ने कबाली में ‘इन मूवी’ विज्ञापन किए है। दक्षिण भारत में तो कुल मिलाकर ऐसा माहौल बना दिया गया है, मानो कबाली फिल्म देखना लोगों का राष्ट्रीय कर्तव्य हो। रजनीकांत फैन्स क्लब हजारों आयोजन कर चुके है और इस तरह के वीडियो भी जारी हुए है कि किस तरह 20 मिनिट में आप भी रजनीकांत के कबाली वाला लुक पा सकते है।

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सोशल मीडिया पर कबाली को ऑल टाइम सुपरहिट फिल्म बताया गया। इंटरनेट पर इस फिल्म को लीक करने वालों के लिए भी संदेश दिया गया है कि इस फिल्म को कितना भी डाउनलोड कर लें, लेकिन इसका असर सिनेमा घरों में नहीं पड़ने वाला। बॉलीवुड के अनेक सितारों ने सोशल मीडिया पर अपील की है कि वे इस फिल्म को सिनेमा घर में ही देखने जाए और चोरी से इंटरनेट पर रिलीज होने वाले समाचारों पर ध्यान न दें। बॉलीवुड सितारों का कहना है कि कोई भी फिल्म खून-पसीने की मेहनत से तैयार की जाती है और उसे इस तरह चोरी करके देखना गैरकानूनी और अनैतिक दोनों है। स्वयं रजनीकांत की तरफ से ट्विटर पर संदेश दिया गया कि मूर्ख मत बनिये। कबाली देखने का मजा सिनेमाघर में ही है।

23 July 2016

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