
डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी राज्य सभा में लगातार धमाके कर रहे हैं, लेकिन इसके पहले वे सोशल मीडिया में धमाके करते हैं, जिससे उनकी योजनाओं का आभास हो जाता है। गुरुवार की सुबह उनके एक 'ट्वीट बम' ने मीडिया के कई दिग्गजों के होश फाख्ता कर दिये। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा कि आगस्ता वेस्टलैंड ने 2010 से 2012 तक 60 लाख यूरो (करीब 45 करोड़ रुपये) क्रिस्टियन मिशेल को भारतीय मीडिया को 'मैनेज' करने के लिए दिये। इसके बाद मीडिया में हलचल तो मचनी ही थी क्योंकि ट्विटर पर उनके 25 लाख से ज़्यादा फॉलोअर हैं। डॉ स्वामी औसतन रोजाना 18 सन्देश ट्वीट करते हैं। वे जुलाई 2009 से ट्विटर पर सक्रिय हैं।

इसके बाद डॉ स्वामी ने राज्य सभा में भी इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की। उन्होंने अपने बयान में कहा कि आगस्ता वेस्टलैंड डील में मीडिया मैनेजमेंट के लिए कंपनी ने 22 महीने तक लगातार पौने तीन लाख यूरो (2 करोड़ रुपये के करीब) खर्च किये हैं। इसके ऐवज में उस डील के बारे में मास मीडिया में नकारात्मक ख़बरें दबा दी गईं। इसी विषय पर न्यूज़ चैनल टाइम्स नाउ में बहस हुई और बताया गया कि इस धन से 20 जानेमाने पत्रकारों को मैनेज किया गया यानी 22 महीने तक करीब दस लाख रुपये 20 पत्रकारों पर खर्च किये जाते रहे। अब भारतीय मीडिया में हड़कम्प मचा है कि वे 20 पत्रकार हैं कौन? 'आगस्ता पत्रकार' हैशटैग से ट्विटर पर लोगों ने लिखा कि पूरा मामला साफ़ और सीधा है, लेकिन कुछ पत्रकार तटस्थता और संतुलन के नाम पर दोनों ही पक्षों को आमने-सामने कर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहते हैं। यह भी हो सकता है कि दूसरे पक्ष के बहाने वे अपना बचाव कर रहे हों। कई लोगों ने जनरल वी के सिंह की बात याद दिलाते हुए लिखा कि उन्होंने 'प्रेस्टीट्यूट' शब्द इस्तेमाल सही किया था।

गुरुवार को ही वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट करके जिज्ञासा जताई कि वे भी उन पत्रकारों के नाम जानना चाहते हैं जिन्होंने आगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर डील में ख़बरें दबाने के लिए 'रिश्वत' ली है। उन्होंने यह भी लिखा कि अब 'स्टेबल' की सफाई का वक़्त आ गया है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने रात के शो में इस मुद्दे पर चर्चा भी की। ट्विटर पर तो चॉपर गेट, आगस्ता पत्रकार, आगस्ता वेस्टलैंड, प्रेस्टीट्यूट जैसे कई हैशटैग चलन में आ गए और हेलीकॉप्टर डील में किकबैक को लेकर नेताओं के साथ पत्रकारों पर भी तंज़ कैसे जाने लगे। सोशल मीडिया पर गड़े मुर्दे उखाड़ने का दौर चल गया और शक की सुई बिना नाम लिए ही कुछ मशहूर पत्रकारों पर जाकर टिक गई।

सोशल मीडिया को ही अखाड़ा बनाकर कई नेताओं ने राजनीति शुरू की। इनमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से लेकर फिल्म जगत के आमिर खान और शबाना आज़मी, पत्रकार सागरिका घोष (राजदीप सरदेसाई की पत्नी), आशुतोष, कांग्रेस और भाजपा के प्रवक्ता तो ठीक पाकिस्तान के पत्रकार भी भारत के नेताओं, सैन्य अधिकारियों और भारतीय मीडिया पर बयानबाजी में जुट गए। सबसे जोरदार सफाई ट्विटर पर दी आगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर डील करानेवाले बिचौलिये ने खुद। भारत में सोशल मीडिया पर 'रायचंदों' की बाढ़ आ गई !
लोगों ने सोशल मीडिया पर केवल अपने विचार ही नहीं शेयर किये, बल्कि फोटोशॉप किये हुए चित्र, कार्टून, चार्ट और रेखाचित्रों के जरिये अपनी जागरूकता का परिचय देने लगे। एक बड़े वर्ग के निशाने पर कांग्रेस और सोनिया गांधी थीं, जिनके बयान पर भी लोगों ने अपनी राय लिखी कि वे क्योंकर डरने लगीं? हमले और बचाव का शीत युद्ध सोशल मीडिया पर भी छिड़ गया, जो अनवरत जारी है। यह सोशल मीडिया की ही ताकत है कि कोई भी विषय चर्चा से अछूता नहीं रह सकता, चाहे ओह पत्रकारों के बारे में ही क्यों न हो !

30 April 2016
23 April 2016 8.15 am
सोशल मीडिया पर दैनिक सुबह सवेरे में प्रकाशित मेरे अन्य कॉलम
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